इस वेबसाइट को निर्माण करने में अनेक मुद्रित तथा डिजिटाइज़ किये हुए साहित्यका उपयोग किया है। डिजिटाइज़ किया हुआ साहित्य इंटरनेट पर पुरालेख संग्रहोंमे (आर्काइव्जमें ) उपलब्ध हुआ। उन सभी संस्थाओंके हम ऋणी हैं। कुछ अनुपलब्ध साहित्य निम्नलिखित संस्थाओं और शुभचिंतकोंसे प्राप्त हुआ, उनके हम आभारी हैं।
भातखंडे स्मृति ग्रंथ - इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, छत्तीसगढ़
मेरी दक्षिण भारत की संगीत यात्रा- इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, छत्तीसगढ़.
“Bhatkhande’s Contribution to Music”- by Sobhana Nayar, Popular Prakashan, Mumbai; (मुद्रित प्रत उपलब्ध);
“Music Makers of the Bhatkhande College of Music”- by Susheela Misra, Sangeet Research Academy, Kolkata;
पंडित भातखंडे जी के बड़ौदा (1916) और दिल्ली (1918) के ऑल इंडिया म्यूजिक कॉन्फरन्स में दिए हुए भाषण का हस्तलिखित - (स्वर्गीय विदुषी गीताबेहेन मेयर के संग्रह से) सुश्री पल्लवी शाह और श्री अजय मेयर;
कुछ प्राचीन ग्रन्थ - श्री चैतन्य कुंटे, डॉ अशोक दा रानडे आर्काइव्ज के संस्थापक निदेशक;
कुछ प्राचीन ग्रन्थ – डॉ. अबिरलाल गंगोपाध्याय, हैदराबाद;
कुछ प्राचीन ग्रन्थ - श्री राजेंद्र ठाकुरद्वारकर, बुरहानपुर, मध्य प्रदेश ;
अभंगों का तत्वद्न्यानार्थ - श्री. दिवाकर घैसास, डोंबिवली;
वर्णम का गायन- श्री. एन एम् अनूप कृष्णन, म्युझीशियन, असिस्टंट प्रोफेसर, सिव्हिल इंजिनीरिंग डिपार्टमेंट, आय आय टी, देहली;
अभंगोंका गायन - विदुषी अपूर्वा गोखले;
पंडित यशवंत महालेजी को आचार्य श्री ना रातंजनकरजी का दीर्घकाल सहवास मिला और उन्हें उनसे जो दस्तावेज प्राप्त हुए; तथा प्रत्यक्ष चर्चा के दरम्यान जो जानकारी मिली और उन्होंने कई दशकोंसे जो सामुग्री जुटायी; उसके बिना यह वेबसाइट का निर्माण लगभग असंभव था। उनकी प्रेरणा और अमूल्य मार्गदर्शनसेही इस वेबसाइट को बनाना संभव हुआ।