चतुरसुजान वेबसाइट की रूपरेषा

वेबसाइट में निम्न विभाग शामिल किए हैं।

(A) गुरू शिष्य परंपरा - इस विभाग में पंडित भातखंडेजी पर संगीत के जो प्रारंभिक संस्कार हुए और उसके पश्चात उन्होंने किन पंडितों और उस्तादों से शिक्षा ग्रहण किया ; पारंपारिक ख्याल, ध्रुपद, धमार और अन्य संगीत प्रकारों का संग्रह किया, उनका विवरण किया है। बाद में गुरू शिष्य परंपरा के चार्ट्स दिए हैं - पंडित भातखंडे जी के गुरू, पंडित भातखंडेजी के प्रमुख शिष्य और आचार्य श्री ना रातंजनकरजी के शिष्यों की परंपरा के बारे में जानकारी दी है।

(B) पंडित भातखंडे जी की जीवनी और कार्य - इस विभाग में उनकी जीवनी और महत्वपूर्ण कार्य का ब्यौरा दिया हुआ है। (संदर्भ - "भातखंडे स्मृति ग्रंथ" )

(B-I-1) जीवन चरित्र- "भातखंडे स्मृति ग्रंथ" में आचार्य श्री ना रातंजनकरजी ने लिखा हुआ लेख उद्धृत किया है।

(B-I-2) स्मृतियों के पराग- इस विभाग में मान्यवरों ने लिखे हुए संस्मरणात्मक लेखों का संग्रह है; जो भातखंडे जी के संपर्क में आए थे और जिनपर पंडित भातखंडे जी का गहरा प्रभाव पड़ा था।

(B-I-3) इच्छापत्र - पंडित भातखंडे जी ने ध्येयोंकी पूर्ति के लिए अपना जीवन न्योछावर किया था और संगीत सेवासे कुछ धन अर्जित नहीं किया था, तथा किसी चीजका उत्तरदायित्व किसीको समर्पित करना उनके लिए आवश्यक नहीं था। इस लिए भातखंडेजी, भविष्य में जो जो कार्य पूरा कर लेना चाहते थे, उन विचारों का, ग्रंथ के संपादक मंडल ने, इस इच्छापत्रमे संकलन किया है।

(B-II) जीवन का उल्लेखनीय घटनाक्रम - यह विभाग स्मृति ग्रंथ से उद्धृत किया है।

(B-III) कॉन्फरन्स रिपोर्ट्स, विविध भाषण और लेख - पंडितजी ने ५ ऑल इंडिया म्यूजिक कॉन्फ़रन्सेस का गठन किया था। इस विभाग में उपलब्ध कॉन्फरन्स रिपोर्ट्स, पंडित जी के भाषण और लेखो के संग्रह की पीडीफ़ कॉपीज समाविष्ट किये गए हैं।

(B-IV) मारिस कॉलेज और भातखंडे संगीत विद्यापीठ की स्थापना - इस विषय पर सुश्री सुशीला मिस्राजी ने “Music Makers of The Bhatkhande College of Music” किताब लिखी थी; जो संगीत रिसर्च ऍकैडमी, कोलकता ने प्रसिद्ध की थी । इस किताब में मारिस कॉलेज के गठन का इतिहास, स्थापना काल में कॉलेज से जुड़े हुए संगीतशास्त्रीओं का, पढानेवाले गुरु और पढ़ने वाले प्रमुख शिष्यों की जानकारी दी है। किताबकी PDF कॉपी इस विभागमे शामिल की गयी है।

(B-V) मारिस कॉलेज, बडौदा और ग्वालियर के संस्थाओं को मार्गदर्शन - पंडित भातखंडे शिक्षण संस्थाओं को जो विस्तृत मार्गदर्शन करते थे उस पत्र व्यवहार को इस विभागमे शामिल किया है।

(B-VI) संपादित किए हुए प्राचीन और अर्वाचीन ग्रन्थ - पंडित जी ने संगीत विषय के बारे में अनेक प्राचीन ग्रंथ और अर्वाचीन ग्रंथ शुद्धीकरण करके प्रकाशित किये थे। उनमें से 21 ग्रंथोंकी PDF कॉपीज उपलब्ध है ताकि विद्यार्थी और संशोधक उन्हें पढ़ सके।

(B-VII) पंडित जी ने लिखे हुए साहित्य निर्मिती क्रमिक पुस्तक मालिका, संगीत पद्धती और अन्य किताबें - क्रमिक पुस्तक मालिका के 6 ग्रंथ, संगीत पद्धति के पांच ग्रंथ और अन्य जो ग्रंथ लिखे थे उनका समावेश ग्रंथ सूची में किया है। इस विभाग में जिन किताबोंकी PDF कॉपी उपलब्ध है उनकी लिंक दी है।

(B-VIII) बंदिशों का निर्माण - पंडित भातखंडे जी द्वारा रचित 69 गीतों के बोल और नोटेशन को ग्रंथ में संग्रहित किया था, जिनका समावेश इस विभाग में किया है।

(B-IX) भारत भ्रमण और शोध यात्राओं के डायरीओं का संक्षेपमे वर्णन - पंडित जी ने संगीतद्न्यों से परिचय, चर्चा एवं उपयुक्त साहित्य का संग्रह करने हेतू पश्चिम, दक्षिण, पूर्व और उत्तर भारत की यात्राएं की थी। दक्षिण भारत के यात्रा का “ इंदिरा कला विश्व महाविद्यालय, खैरागढ़ ” ने किया हुआ हिंदी में भाषांतर उपलब्ध है। इस भाषांतर के PDF कॉपी की लिंक इस विभाग में दी है। दक्षिण, पूर्व और उत्तरभारत की यात्राओंमे पंडित भातखण्डेजी किन विद्वानोंसे मिले और उनके साथ जो चर्चा हुई इसका ब्यौरा संगीत पद्धति - मराठी (संगीत शास्त्र- हिंदी) इन किताबोंमे जगह जगह पर दिया है। पश्चिम भारत के यात्रा की डायरी-हस्तलिखित उपलब्ध नहीं है।

(B-X) चरित्र एवं स्मृति ग्रंथ - पंडित भातखंडे जी के चरित्र के बारे में लिखे हुए ग्रंथोंकी जानकारी इस विभाग में दी है।

(C) डॉ. रातंजनकरजी की जीवनी और कार्य - इस विभाग में उनकी जीवनी और महत्वपूर्ण कार्य का ब्यौरा दिया हुआ है। (संदर्भ - आचार्य श्रीकृष्ण रातंजनकर 'सुजान' जीवनी तथा स्मृतिसंचय)

(C-I) संक्षेप में आत्मचरित्र - आचार्य रातंजनकरजी ने अपनी जीवनी स्वयं टाइप की थी- जीवनी ग्रंथ से उद्धृत;

(C-II) जीवनी - उल्लेखनीय घटनाक्रम -

(C-III) संगीत की शिक्षा - साधना का पहला अध्याय

(C-IV) मारिस कॉलेज, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय और श्री वल्लभ संगीतालय में योगदान - लखनऊ की कर्मभूमि - लखनऊ खैरागढ़ और बम्बई

(C-V) व्यक्तित्व संधान - सांगीतिक – व्यावहारिक

(C-VI) संगीत विद्यादान - अन्यतम विद्या गुरु

(C-VII) जीवन का अंतिम अध्याय - सुनता है गुरु ग्यानी

(C-VIII) नवराग निर्मिति और बंदिश रचना - प्रतिभा संपन्न रचनाकार एवं वाग्गेयकार

(C-IX) विद्यानिधि गुरुकी छत्रछायामे - उनके शिष्यों और अन्य गायकों द्वारा लिखे गए लेख, जो उन्हें गुरु के रूप में सम्मान देते थे;

(C-X) यादों के झरोंखों से अण्णासाहब - उनके शिष्यों और अन्य प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा साझा की गई यादें;

(C-XI) हस्ताक्षर का नमूना, विशेष सन्देश और सम्मानमे कविता

(C-XII) साहित्य निर्मिती और बिब्लिओग्राफी

(D) भातखण्डेजी की दूरदर्शिता - अपने जीवन कालमे कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर पंडित भातखण्डेजी का अध्ययन और शोध अंतिम चरण तक नहीं पहुँच पाया था। उसी प्रकार, कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर उनका काम अपूर्ण था । ऐसी परियोजनाओं की सूची उद्धृत की है जो अभी और भविष्यमें संशोधनकर्ताओंको मार्गदर्शक रहेगी।

(E) आर्काइव्ह - इस विभागमे पंडित भातखंडे और आचार्य रातंजनकरजी के साहित्य तथा पंडित भातखंडेजी ने संकलित की हुई बंदिशों और आचार्य रातंजनकरजीके स्वनिर्मित बंदिशों के गायन के ऑडिओज का समावेश किया गया है।

(F) फोटो गैलरी

(G) आभार और श्रेय

(H) कॉपीराइट्स

(I) हाल के बदलाव