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पंडित वि. ना. भातखंडे बीसवी शताब्दी के संगीत विश्व के युगपुरुष थे। उन्होंने प्रचलित हिंदुस्तानी सङ्गीतको शास्त्रबद्ध करनेका और शास्त्रीय संगीत को सामान्य जन तक पहुंचाने का कठिन कार्य किया है। पंडित वि. ना. भातखंडेजी की परंपरा का रक्षण तथा उसे समृद्ध करने का कार्य उनके प्रधान शिष्य आचार्य श्री. ना. रातंजनकर और उनके शिष्यों ने निरंतर किया है। पंडित भातखंडे और आचार्य श्री. ना. रातंजनकरजी के महान कार्य की स्मृति चिरंतन रखने के हेतूसे इस संकेतस्थल की निर्मिति की गयी है।

