आचार्य श्री ना रातंजनकरजी ने राग लक्षणगीत के समान ताल लक्षणगीत यह एक नूतन कल्पना की रचनाऐं की हैं। इन बन्दिशोंमें १९ तालोंकी विशेषताएँ दर्शानेवाली बन्दिशों की रचना की है। “अभिनव गीत मंजरी” के तीसरे भाग में इन ताललक्षण गीतोंका समावेश किया है। ऑडिओज के नमूने उपलब्ध होनेपर इस विभागमे सम्मीलित किये जायेंगे।
| ताल दादरा - राग देस |
ताल तीव्रा - राग केदार |
ताल रूपक – राग तिलककामोद |
ताल कहरवा - राग खमाज |
| ताल झपताल - राग छायानट |
ताल सूल ताल - राग मारवा |
ताल सार्धरूपक (१०।। मात्रा) - राग दरबारीकानड़ा |
ताल चौताल - राग शंकरा |
| ताल एकताल - राग मधमादसारंग |
ताल विक्रम - राग हिंडोल |
ताल आड़ाचौताल - राग अडाना |
ताल झूमरा - राग हमीर |
| ताल दीपचंदी - राग काफी |
ताल धमार - राग मालकौंस |
ताल सवारी - राग तोड़ी |
ताल त्रिताल - राग बिहाग |
| ताल गजमुख - राग देशकार |
ताल हंसविलास - राग अल्हैयाबिलावल |
ताल पंचानन - राग बहार |
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